पुणे में आयकर के खिलाफ हिंदुओं का संघर्ष: एक दिल दहला देने वाली कहानी
पुणे में आयकर के खिलाफ हिंदुओं का संघर्ष: एक दिल दहला देने वाली कहानी 😢✊ पुणे , 1860 । सूरज ढल रहा था , और बुधवारवाडा की संकरी गलियों में एक अजीब-सी हलचल थी। हवा में तनाव की गंध थी , जैसे कोई तूफान आने वाला हो। 😨 यह वह समय था जब ब्रिटिश शासन ने भारत की धरती पर अपने पंजे गड़ा दिए थे। अब अंग्रेजों द्वारा भारत को लूटने का खेल शुरू हो गया। उनके नए - नए क ानून , कर , और नियम भारतीयों के लिए गले की फांस बन रहे थे। इन्हीं में से एक था आयकर एक ऐसा कर जो न केवल लोगों की मेहनत की कमाई छीन रहा था , बल्कि उनकी स्वतंत्रता और सम्मान को भी कुचल रहा था। 💔 वे यहां भारतीयों , विशेषकर हिंदुओं की संपत्ति लूटने आए थे और वे यह काम बखूबी कर रहे थे। 14 नवंबर , 1860 की दोपहर। पुणे के धनी साहूकार , जिन्हें स्थानीय लोग "सावकार" कहते थे , बुधवारवाडा में स्थित कर निर्धारण कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। ये सावकार न केवल धनवान थे , बल्कि समाज में उनकी इज्जत भी थी। दयाराम और सखाराम मुख्य नेतृत्वकर्ता थे और उनके साथ करीब बीस अन्य साहूकार थे , जो ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा ...