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Showing posts from December, 2023

हलांग

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मणिपुर राज्य के उखरूल जिले के उखरूल तहसील के हालांग गांव के बारे में जानेंगे। मेइतेई भाषा में हालांग गांव को ह्यूनिंग भी कहते है। हालांग गांव की ३००० से ज्यादा जनसंख्या नही है। हालांग गांव का पुरुष - स्त्री रेश्यो हैं १००० - १०११ अर्थात पुरुषों से महिलाए ज्यादा है। हालांग गांव में ज्यादातर तंगखुल नागा जनजाति के लोग रहते है। विकिपीडिया के अनुसार हालांग गांव में ज्यादातर लोग ईसाई हो चुके है। तंगखूल नागा जनजाति प्रकृति पूजक है, पर ईसाई होने के बाद भी क्या ये लोग प्रकृति की पूजा कर रहे है? ये मुझे तो नही पता अगर आपको पता हो तो जरूर बताना। हालांग गांव के निसर्ग के कारण लोग वहा पर्यटन के लिए जाते है। हालांग गांव में कॉसमॉस फूड फेस्टिवल आयोजित किया जाता है जिसमे तरह तरह के तंगखुल पकवान खाने के लिए मिलते हैं। हालांग गांव चिंगाई विधानसभा क्षेत्र में आता है। हालांग गांव आउटर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है। हालांग गांव का पिनकोड ७९५१४२ है। हालांग गांव के नजदीक इरील तथा थाउबल नदियां है। हालांग गांव में ईसाई मिशनरी स्कूल है। एम के प्रेशो हालांग गांव के विधानसभा प्रतिनिधि है। हालांग गांव में लियंग...

चोइथर

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मणिपुर के पहाड़ी जिले उखरूल के उखरूल तहसील के चोईथर गांव के बारे में जानेंगे। चोइथर गांव उखरूल से ८किलोमीटर की दूरी पर पूर्व दिशा में स्थित है।  चोइथर गांव को राइथर भी कहा जाता है। चोइथर गांव पहाड़ी क्षेत्र में आता है इसीलिए यहा पर पहाड़ी क्षेत्र के लिए बनाए गए कानून लागू होंगे। चोइथर गांव की जनसंख्या १५०० से ज्यादा नही है।  प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत चोइथर गांव को इंफाल कोहिमा राष्ट्रीय महामार्ग से जोड़ा जा सकता है, परंतु मणिपुर के अभी के जो हालत है उनके चलते कई मार्गो का निर्माण कार्य रुक गया है। चोइथर गांव में तंगखुल नागा जनजाति के लोग सर्वाधिक रहते है।  तंगखूल नागा जनजाति एक आदिवासी जनजाति है जो उत्तर पूर्व भारत में रहती है।  तंगखूल नागा जनजाति के लोग प्रकृति के पूजक रहे है और यह ईश्वर को प्रकृति के रूप में ही पूजते आए है। विकिपीडिया के अनुसार अब इस चोइथर गांव के ज्यादातर लोग ईसाई हो चुके है।  प्रश्न यह है की तंगखुल नागा जनजाति के लोग जो अब ईसाई हो गए है क्या वो अब भी प्रकृति की पूजा करते है जैसे पहले करते थे?  चोइथर गांव के ज्यादातर लोग ...