कठुआ

जय श्री राम!
भारत विविधताओं का देश है। अब यही देखिए जम्मू कश्मीर का कठुआ शहर। इस शहर की बात ही अलग है। शहर मे रावी नदी पर से जाने के लिए अटल सेतु है और अगर आपको रेलवे से जाना है तो वो सुविधा भी है।

आप जसरोटा किले जैसे ऐतिहासिक स्थान को देखने के लिए कठुआ तक आकर फिर टैक्सी ले सकते है। अगर आपको बगीचों में घूमना है तो कठुआ में ही ड्रीम पार्क है और डॉ. के के बिरला गार्डन भी है। अगर आपको इंडस्ट्रियल एरिया घूमना है तो वो भी हैं यहां पर। कई मंदिर भी है जहा आप दर्शन करने जा सकते है। और यहां भारतीय सेना की छावनी भी है।
तो ऐसे ही विविधताओं से भरा शहर है कठुआ जहा पर लोगो ने उस विविधता को बनाए रखा। पर बात वही की बहोत कम लोग इसके बारे में जानते है। आप अगर जम्मू कश्मीर घूमने जाना चाहते है तो आपको कश्मीर घाटी की सिर्फ चार जगह के लिए टूर पैकेज मिलेंगे, जहा पर आज अनुच्छेद ३७० हटने के बाद भी आए दिन आतंकवादी पकड़े जा रहे है और ये अभी भी सेंसटिव एरिया है। तो अगर आप जम्मू कश्मीर घूमने जाना चाहते है तो कठुआ शहर और कठुआ जिला आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। 
कठुआ शहर के उत्तर में शिवालिक पर्वत श्रृंखला है और ये शहर तीन नदियों से घिरा है - रावी, उज्ज और सेवा नदी। उज्ज और सेवा नदी पर बने डैम भी घूमने के लिए उत्तम जगह है। रावी माता पर बना अटल सेतु अपने आप में एक अलग ही जगह है। बोटिंग भी आप कर सकते है। स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं की वजह से पूरे भारत की नदिया अब काफी हद तक स्वच्छ हो गई है।
आप एक नही तीन किले देख सकते है जसमेरगढ़, जसरोटा का किला और भाडू का किला।
यहां के लोग आपस में डोगरी भाषा में बात करते है जो भारतीय मूल की भाषा है। डोगरी भाषा में आपको भजन गाते लोग मंदिर में मिल ही जायेंगे। पारंपरिक लोकगीतों और भजनों को यहां के लोग बड़े आनंद से गाते है और इसीलिए वो सुनने को भी अच्छे लगते है। आनंद से गया कोई भी भाषा का गीत भलेही समझे नही पर सुनने को अच्छा ही लगता है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो ऐसी कथा है की २००० साल पहले हस्तिनापुर से जोड़ सिंग यहां आकर बस गए। उनके तीन बेटे थे - तेजू, किंदल और भजू। बस जोड़ सिंग और उनके परिवार ने इस जगह पर रह कर इसका विकास किया और यहां पर राजपूताना सेना भी बनाई गई जिनकी कमान जोड़ सिंग के तीन बेटों के हाथ में थी। पर इस कथा के या इन तीन राजपूत योद्धाओं के इतिहास के पक्के प्रमाण कही पर है नहीं। हो सकता हो अकर्मणकारी अधर्मियों ने उस इतिहास को नष्ट किया हो।
तो यह था कठुआ शहर से जुड़ा एक छोटा सा लेख अगर आप इस जगह गए हो तो कमेंट में अपने अनुभव जरूर लिखिए। धन्यवाद!
जय जय श्री राम।

Comments

Popular posts from this blog

कानिफनाथ महाराज

सूरत का ज्वालामुखी: हिंदुस्तान की एकता और अंग्रेजी दमन की खूनी गाथा

त्र्यंबक, तहसील त्र्यंबकेश्वर, जिला नासिक: