शंकराचार्य मठ, श्रीनगर

जय श्री राम!

गर्मी का मौसम आते ही हिन्दू किसी ठंडी जगह जाना पसंद करते हैं| और भारत की सबसे ठंडी जगह हैं श्रीनगर| अभी गर्मियों की छुट्टियां भी हैं तो कई हिन्दू परिवार कश्मीर की यात्रा प्लान करते हैं| 

आप श्रीनगर आते ही सबसे पहले ये सोचते हैं की ये गार्डन देखू वो गार्डन देखू| और इन बगीचों के चक्कर में आप आपके ही मुख्य मंदिर को भूल जाते हैं| शंकराचार्य मठ ऐसा ही एक स्थान हैं जहा बिना किसी झिझक के हर हिन्दू को जाना चाहिए| दल झील से अगर आप कोई गाड़ी लेकर निकलते हैं तो आधे घंटे में शंकराचार्य मठ के करीब पहोच जाते हैं| और उसके बाद आपको करीब २४० सीढियां चढ़ कर शंकराचार्य मठ के शिव मंदिर के दर्शन हो सकेंगे| सीढियाँ चढ़ते समय शिव शंकर शम्भू का स्मरण करते हुए सीढियाँ चढ़नी चाहिए|

मंदिर का इतिहास:

शंकराचार्य मठ का यह मंदिर ज्येष्ठेश्वर के नाम से जाना जाता हैं| इस मंदिर में आदि शंकराचार्य का मठ था| यह मंदिर राजा गोपदित्य के समय बना था| स्वयं राजा ने ही इस मंदिर के निर्माण के लिए यह जगह दी थी और अर्थसहाय भी दिया था| करीबन ३७१ ईसा पूर्व के करीब इस मंदिर का निर्माण हुआ हैं और इस जगह पर पूरी शंकराचार्य पहाड़ी तथा दल झील के किनारे तक उस समय हिन्दू बसते थे|
हूणों के राजा मिहिरकुल भी भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और उन्होंने इसी शंकराचार्य मठ की पहाड़ी पर हलादा के पास मिहिरेश्वर मंदिर बनाया था| उस समय हुन जो की एक विचरती जनजाति हैं और हिन्दू समाज में आपसी सम्बन्ध प्रेमभरे थे और व्यापार भी अच्छे से होता था|
दोनों मंदिर सदियों से वही थे| ये तो कुछ अंग्रेजी इतिहासकारों ने केवल हिन्दू समाज को निचा दिखाने के लिए और झूठा साबित करने के लिए मंदिर के निर्माण को १७ या १८ वे सदी का बता कर इतिहास को बदल दिया| और उनका घोला जहर आज भी देश को बीमार कर रहा हैं|
मंदिर तो पहले से ही था उसके बाद आठवी सदी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर में कुछ दिनों तक वास्तव्य किया और इसीलिए इसे शंकराचार्य मंदिर और पूरी पहाड़ी को शंकराचार्य पहाड़ी कहा जाता हैं| यही पर रहकर आदि शंकराचार्यजी ने सौंदर्य लाहिरी ग्रन्थ को लिखा|
उसके बाद १९ वि सदी में डोगरा राजा गुलाब सिहं ने दुर्गा नाग मंदिर से शिव मंदिर तक सीढियों का निर्माण किया| मुस्लिम सुल्तानों ने भी इसे अपने हिसाब से नाम देने की कोशिश की जैसे कोह-ए-सुलेमान ये नाम मुस्लिम इतिहास में लिखा गया| पर इस जगह की पवित्रता आज भी बनी हैं और ये जगह शंकराचार्य हिल और शंकराचार्य  मठ के नाम से ही प्रसिद्ध हैं|
मंदिर की तरफ जाने वाला रास्ता भारत सरकार की डिफेन्स मिनिस्ट्री के बॉर्डर रोड्स आर्गेनाईजेशन ने १९६९ में बनाया था और ये मंदिर भारत सरकार के कण्ट्रोल में हैं| 
आज शंकराचार्य मंदिर तो अस्तित्व में हैं पर दुर्गा नाग मंदिर के केवल अवशेष बचे हैं| अगर हम हिन्दू श्रीनगर के बाग़ बगीचे घुमने के बजाय शंकराचार्य मंदिर जाने लगेंगे तो इस मंदिर और मंदिर की तरफ जाने वाले रस्ते पर कई सुविधाए अपने आप आने लगेगी और कश्मीर में रहने वाले लोग जो अब शिव आराधना नहीं करते वो शिव मंदिर का खुद रख रखाव करने लगेंगे| जम्मू कश्मीर में आज जितने भी मंदिर हैं वो केवल वहा आने वाले श्रद्धालुओं के कारण हैं| 
करण सिंह जो की एक राजनेता हैं और महाराजा हरी सिंह के पुत्र हैं जम्मू कश्मीर के धर्मार्थ ट्रस्ट के चेयरमैन हैं| धर्मार्थ ट्रस्ट जम्मू कश्मीर के हिन्दू मंदिरों के लिए ही स्थापित किया गया था और १८८४ से हिन्दू धर्म के लिए कार्यरत हैं|

शिवपूजन 
केवल अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाले यात्री ही इस मंदिर के दर्शनों के लिए जाते हैं और वहा शिवपूजन करते हैं| सिर्फ कश्मीर घुमने गए यात्री भी अगर इस मंदिर में पहले जाने लगे तो मंदिर का विकास भी होगा और क्या पता शिव भक्तों का रहना वहा शुरू हो जाए| 


इस मंदिर को हिंदी फिल्मों में बताया तो गया पर मंदिर की गरिमा को धूमिल करने में हमेशा की तरह बॉलीवुड कामयाब रहा और मंदिर को अपराध का एक स्थान बताने में कोई कमी न की गयी| मिशन कश्मीर और पुकार जैसी फिल्मों में इस मंदिर को अपराधी के छुपने की जगह और बताया गया हैं| और हमने ही इन फिल्मों को हद से ज्यादा देखकर प्रसिद्धि दिलाई हैं|

बीती बातों पर चर्चा करने से केवल इतना ही जानना चाहिए की गलती कहा हुई हैं और अब वर्तमान स्थिति में हम क्या सुधार ला सकते हैं ये ही उस चर्चा का सार रहना चाहिए| 
आज से हर हिन्दू जो इस लेख को पढ़ रहा हैं वो इस बात का पुरजोर प्रयत्न करें की जब भी श्रीनगर जाए तब सबसे पहले शंकराचार्य मंदिर के दर्शन करें| शिव आराधना से सबकुछ ठीक हो जायेगा|

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हर हर महादेव|


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