अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 29

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: तत्कालीन राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद १४३ के तहत क्या प्रश्न:  पूछा था?

अ) विवदित ढाचे का विवाद कब ख़त्म होगा?

ब) विवदित ढाचे के पर रामजन्मभूमि मंदिर तथा बाबरी मस्जिद के निर्माण के पहले कोई हिन्दू धार्मिक स्थल था या नहीं?

क) ऐसा कोई प्रश्न:  राष्ट्रपति नहीं पूछ सकते

ड) इसपर सर्वोच्च न्यायालय ने कोई चर्चा नहीं की

उत्तर: ब) विवदित ढाचे के पर रामजन्मभूमि मंदिर तथा बाबरी मस्जिद के निर्माण के पहले कोई हिन्दू धार्मिक स्थल था या नहीं? तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा जी ने देश की सामाजिक अशांति को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद १४३ के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में जनता के कल्याण के लिए अपने अधिकारों के अनुसार यह प्रश्न:  पूछा की विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि मंदिर तथा बाबरी मस्जिद के पहले कोई हिन्दू धार्मिक स्थल था या नहीं? इस प्रश्न:  का सन्दर्भ इस्माइल फारुकी प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने लिया था| पर इस प्रश्न का उत्तर सर्वोच्च न्यायालय के खंडपीठ ने नहीं दिया| और फिर विवादित जमीन से जुड़े सभी अभियोग जो अलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रलंबित थे उन्हें फिर से पुन: अलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए कहा गया|

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प्रश्न: अलाहाबाद उच्च न्यायालय में रामजन्मभूमि विवाद से जुड़े अभियोग में कब से मौखिक साक्ष्य लेना प्रारंभ हुआ?

अ) दी. २४ अक्तूबर १९९४

ब) दी. २४ जुलाई १९९६

क) दी. २३ अक्तूबर २००२

ड) दी. १७ फ़रवरी २००३

उत्तर: ब) दी. २४ जुलाई १९९६| दी. २४ अक्तूबर १९९४ को सर्वोच्च न्यायालय के इस्माइल फारुकी निर्णय के अनुसार रामजन्मभूमि विवाद से जुड़े सभी अभियोगों की पुनः सुनवाई अलाहाबाद उच्च न्यायालय में शुरु हो गयी| फ़ैजाबाद जिला दीवानी न्यायालय में इन अभियोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही थी और न ही कोई साक्ष्य ली गयी थी| इसीलिए अलाहाबाद उच्च न्यायालय में दी. २४ जुलाई १९९६ से मौखिक साक्ष्य लेना प्रारंभ हुआ| स्वतंत्र भारत के नागरिकों के धार्मिक अधिकारों का इतने वर्षो से उल्लंघन तो चल ही रहा था पर उसकी कोई सुनवाई भी पूरी नही हो रही थी| धीमी गति से चलती न्याय व्यवस्था और अन्यायकारी सरकारी नीतिया दोनों भी इसके कारण हैं| और धीरे धीरे ये मुद्दा राजनैतिक दलों के लिए वोट बैंक का कारण कब बन गया पता ही नहीं चला| इसी बिच बाबरी विध्वंस के साथ साथ पुरे देश में कई दंगे हुए जिसमे न जाने कितने निर्दोष राम भक्त मारे गए|

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