अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 34
जय श्री राम!
बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|
अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|
प्रश्न: अलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष चल रहे रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निर्णय अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कब दिया?
अ) ३० सितम्बर २००४
ब) ३० सितम्बर २००८
क) ३० सितम्बर २०१०
ड) ३० सितम्बर २००६
उत्तर: क) ३० सितम्बर २०१०| सरकारी नीतियों के सामने विवश भारत की तथाकथित स्वतंत्र न्याय प्रणाली ने १५३० के दशक में शुरू हुए विवाद पर अपना निर्णय आखिर कार ३० सितम्बर २०१० को दे ही दिया|
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प्रश्न: ३० सितम्बर २०१० को दिए गए रामजन्मभूमि से जुड़े निर्णय में अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने किसे रामजन्मभूमि का स्वामित्व दिया?
अ) निर्मोही अखाड़ा को पूरा हिस्सा
ब) हिन्दू पक्ष को पूरा हिस्सा
क) मुस्लिम पक्ष को पूरा हिस्सा
ड) निर्मोही अखाड़ा, हिन्दू पक्ष और मुस्लिम पक्ष तीनो में हर एक को एक तिहाई हिस्सा
उत्तर:: ड) निर्मोही अखाड़ा, हिन्दू पक्ष और
मुस्लिम पक्ष तीनो में हर एक को एक तिहाई हिस्सा| अलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह निर्णय
किसी भी पक्ष को रास न आया और तीनो पक्ष की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में २०१० और
२०११ के वर्षो में कुल मिलाकर १४ याचिकाए दाखिल की गयी| और इस बात पर कुछ लोग
राजनीती करते हुए विवादित जमीन पर मंदिर तो बिलकुल नहीं बनाना चाहिए ऐसी बयान बाजी
करने लगे| खुद को बहुत बड़ा व्यंगकार कहने वाले कुछ लोग इसपर तंज कसते हुए हिन्दू
भावनाओं का अपमान करने में ही अपनी आय को सुनिश्चित करने लगे थे| तथाकथित व्यंगकार
एवम बुद्धिजीवी हिन्दू देवताओ का मजाक उड़ाने तथा हिन्दू समुदाय को आपस में भिड़ाने
पर अड़े हुए थे| इस पुरे मामले में न हिन्दू दोषी थे और न ही मुस्लिम क्यों की
दोनों ही पक्ष अपने धार्मिक अधिकार के लिए लड़ रहे थे| पर वे लोग दोषी जरुर हैं
जिन्होंने अस्पताल या यूनिवर्सिटी बनाने की सलाह देते हुए हिन्दू भावनाओं को तो
आहत किया ही पर कही न कही परोक्ष रूप से मस्जिद बनाने की इच्छा रखने वाले मुस्लिम
पक्ष को बिना नाम लिए अपमानित किया| आज मुस्लिम पक्ष को यही लगता हैं की पुरे
सिस्टम में उन्हें कोई कुछ नहीं बोल रहा हैं पर ये मुस्लिम पक्ष को भी समझना जरुरी
है जो लोग आज कुछ पैसों तथा सस्ती लोकप्रियता के लिए हिन्दू भावनाओं का मजाक उड़ा
रहे हैं वो कल चल कर उन्ही कुछ पैसों के लिए मुस्लिम पक्ष का भी मजाक उड़ाना शुरू
करेंगे| अब यही देखिये हाल ही में प्रदर्शित हुई पठान फिल्म में पठान – एक मुस्लिम
जाती को पूरी तरह से लड़कीबाज बताया गया जबकि पठान या मुस्लिम ऐसे नहीं होते ऐसा
दावा कई मौलवियों ने कर फिल्म का विरोध किया| उसके बाद आई रामायण कथा पर आधारित
आदिपुरुष फिल्म में रावण तथा असुर सेना को मुस्लिमो की तरह बताया गया| जब आम
मुस्लिमो से इसपर राय मांगी गयी तो लोग बोले यह पूरी फिल्म भगवान राम की तौहीन तो
हैं ही पर राक्षसों को मुस्लिमों की तरह बताकर कही न कही समाज में मुस्लिमों के प्रति
डर और संशय का उदभव हो गया हैं| ये दोनों पक्षों को ध्यान में रखने की जरुरत हैं
की तथाकथित लोकप्रिय व्यक्ति जो लेखक, कलाकार अथवा व्यंगकार हैं वो केवल पैसों के
लिए काम कर रहे हैं अगर पैसों के लिए उन्हें मुस्लिमों को बुरी तरह से बताना पड़ा
तो वो वह भी करेंगे|
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