अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 45

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: निर्मोही अखाड़े के पंचो ने निर्मोही अखाड़े की परम्पराओ से सम्बंधित विलेख कब लिखा था?

अ) १९ मार्च १९४९

ब) २२ दिसंबर १९४९

क) २३ दिसंबर १९४९

ड) २९ नवम्बर १९४९

उत्तर: अ) १९ मार्च १९४९| इस विलेख के अनुसार “अयोध्या नगरी के मोहल्ला राम घाट में रामजन्मभूमि मंदिर हैं तथा उस मंदिर का प्रबंधन निर्मोही अखाड़े के महंत का उत्तरदायित्व हैं| रामजन्मभूमि होने के कारण यह अयोध्या का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर हैं|”

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प्रश्न: डॉ राजीव धवन कौन थे?

अ) रामजन्मभूमि विवाद में निर्मोही अखाड़े के वकील

ब) रामजन्मभूमि विवाद में केन्द्रीय सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील

क) रामजन्मभूमि विवाद में गोपाल सिंह विशारादजी के वकील

ड) एक आम डाक्टर थे जिनके पास हिन्दू मुस्लिम दोनों जाते थे?

उत्तर: ब) रामजन्मभूमि विवाद में केन्द्रीय सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील| डॉ राजीव धवन के अनुसार सरकार को पहले से बाबरी मस्जिद में हिन्दू लोग मुर्तिया रखनेवाले हैं ये पता था, हिन्दू समुदाय के लोग बाबरी मस्जिद में आने वाले मुस्लिम लोगों को परेशान करते थे, इसीलिए मुस्लिम डरे हुए थे, और इन सब की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कारवाही नहीं की हिन्दुओ को मस्जिद में मुर्तिया स्थापित करने से रोकने के लिए|

आगे डॉ राजीव धवन ने ये भी दलील दी थी की फैजाबाद पुलिस अधीक्षक कृपाल सिंह ने दी. २९ नवंबर १९४९ को फैजाबाद सहायक आयुक्त तथा जिला मजिस्ट्रेट के के नायर के समक्ष प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में ये कहा था की “बाबरी मस्जिद के चारो तरफ कई हवनकुंड बनाये गए हैं| पूरनमाशी के दिन एक बड़ा यज्ञ आयोजित किया गया हैं जिसमे हजारो हिन्दू, सन्यासी, साधू, बैरागी बाहर गाव से भी आने वाले हैं| इस वजह से मुस्लिमों का बाबरी मस्जिद में प्रवेश कठिन हो जायेगा और मुस्लिमों को बाबरी मस्जिद छोड़नी पड़ेगी|”

आगे डॉ राजीव धवन ने ये भी दलील दी थी की दी. १० दिसंबर १९४९ को मो. इब्राहीम, वक्फ निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था की “हिन्दू और सिखों के डर से मुस्लिम बाबरी मस्जिद में आकर नमाज निशा नहीं कर पा रहे हैं| हिन्दू मस्जिद में आनेवाले तथा रुकनेवाले मुस्लिमों को डराते धमकाते हैं| स्थानिक मुस्लिम लोगों के अनुसार हिदुओ से मस्जिद को खतरा हैं| मस्जिद शाही स्मारक हैं इसीलिए इसका जतन होना जरुरी हैं|”

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