अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 54

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: न्यायव्यवस्था उसे ही न्यायिक व्यक्ति मानती हैं जिसके पास ______________ है?

अ) माँ, बंगला, गाडी

ब) पिता, पत्नी, बेटी

क) अधिकार, दायित्व, कर्त्तव्य

ड) सेवा, भक्ति, पुण्य

उत्तर: क) अधिकार, दायित्व, कर्त्तव्य| जिसके पास अधिकार, दायित्व, कर्त्तव्य हैं उस व्यक्ति, संस्था, या कोई भी निर्जीव वस्तु को न्यायव्यवस्था न्यायिक व्यक्ति मानती हैं तथा न्यायिक व्यक्ति के पास अभियोग दाखिल करने का अधिकार होता हैं|

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प्रश्न: एक न्यायिक व्यक्ति होने के लिए क्या चाहिए?

अ) कुछ न्यायिक अधिकार

ब) कुछ न्यायिक दायित्व

क) अन्य न्यायिक व्यक्तियों के साथ न्यायिक सम्बन्ध बनाने का अधिकार

ड) उपरोक्त सभी

उत्तर: ड) उपरोक्त सभी| जब भी किसी मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा होती हैं और मंदिर बनाया जाता हैं तब हिन्दू भक्त उस मंदिर में चढ़ावा चढाते हैं| वो चढ़ावा पुजारी के लिए नहीं अपितु भगवान के लिए होता हैं| मंदिर जिस जमीन पर बनाया जाता हैं वह जमीन भी किसी भक्त ने दान में ही दी रहती हैं और भगवान के लिए दिया कोई भी दान अक्षय निधि (endowment) के रूप में पंजीकृत होता हैं भगवान के ही नाम से| जैसे ही अक्षय निधि का पंजीकरण स्थापित भगवान की मूर्ति के नाम से होता हैं, भगवान की मूर्ति के पास न्यायिक अधिकार आता हैं की वे चल अचल संपत्ति का चढ़ावा स्वीकार करे| अक्षय निधि का पंजीकरण भगवान की मूर्ति तथा मंदिर का प्रबंधन करने वाले जो भी लोग हैं उनके हाथो होने वाले कुप्रबंधन को भी रोकता हैं| और ये अक्षय निधि का पंजीकरण ईसापूर्व कई सदियों से हिन्दू विधिशास्त्र के अनुसार होता आया हैं| इसका अर्थ यह भी हैं की जब महाराज विक्रमादित्य के समय में रामजन्मभूमि मंदिर निर्मित हुआ था तब भी इस मंदिर का पंजीकरण महाराज विक्रमादित्य के न्यायाविधान के अनुसार हुआ ही होगा| इसीलिए भगवान श्री राम विराजमान को भारतीय विधिशास्त्र में एक न्यायिक व्यक्ति का स्थान दिया गया है|

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