अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 58

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: सन १८५८ के न्यायालयीन निर्णय के अनुसार बाबरी मस्जिद को क्या कहा जाता था?

अ) बाबरी मस्जिद

ब) जन्म स्थान मस्जिद

क) मस्जिद जन्म स्थान

ड) उपरोक्त में से ब) और क)

उत्तर: ड) उपरोक्त में से ब) और क)| १८५६-५७ में विवादित स्थान तथा हनुमानगढ़ी के लिए हिन्दू मुस्लिम दंगे हुए थे| उसके बाद १८५८ में निहंग सिंह फ़क़ीर खालसा इस सिख व्यक्ति ने मस्जिद के अन्दर गुरु गोविन्द सिंह जी का हवन पूजन किया तथा मस्जिद के अन्दर श्री भगवान की प्रतिमा को स्थापित किया| इस समय जो भी न्यायालयीन कामकाज के दस्तावेज बने उन सभी दस्तावेजों में विवादित मस्जिद का नाम “जन्म स्थान मस्जिद” अथवा “मस्जिद जन्म स्थान” ही लिखा गया था| उसके बाद १८८५ में महंत रघुबर दासजी ने राम चबूतरे पर मंदिर निर्माण की अनुमति का अभियोग फ़ैजाबाद उप-न्यायाधीश के समक्ष दाखिल किया था उसमे भी बाबरी मस्जिद की जगह विवादित मस्जिद का नाम “जन्म स्थान मस्जिद” अथवा “मस्जिद जन्म स्थान” ही लिखा गया था| इसका अर्थ यह हैं की रामजन्मभूमि की जगह पर राम मंदिर था जिसे जन्म स्थान मंदिर भी कहा जाता था| उस मंदिर का विध्वंस कर उसे मस्जिद बनाने का काम बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने १५२८ में किया था|

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प्रश्न: अपराधिक प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अनुसार रामजन्मभूमि के प्रबंधन का दायित्व निर्मोही अखाड़े से लेकर प्रिय दत्ता राम, अध्यक्ष फ़ैजाबाद नगर निगम को दिया गया?

अ) धारा १४५

ब) धारा १४६

क) धारा १४७

ड) धारा १४८

उत्तर: अ) धारा १४५| जब २२ दिसंबर १९४९ की रात को ५०-६० सनातनी भाइयों ने विवादित मस्जिद के ढाचे के ताले तोड़ अन्दर रामलला के साथ अन्य मूर्तियों की स्थापना की उसके बाद हजारों लोग रामजन्मभूमि पर एकत्रित हो २३ दिसंबर १९४९ की सुबह से कीर्तन करने लगे| इसके बाद फ़ैजाबाद जिला मजिस्ट्रेट ने धारा १४५ के अनुसार इस जमीन से जुड़े विवाद की वजह से होने वाली अशांति को रोकने के लिए दी. २९ दिसम्बर १९४९ को फ़ैजाबाद-अयोध्या नगर निगम बोर्ड के अध्यक्ष प्रिय दत्त रामजी को प्राप्तकर्ता तथा प्रबंधन के लिए नियुक्त किया और उसके बाद ५ जनवरी १९५० के दिन प्रिय दत्त रामजी ने प्राप्तकर्ता तथा प्रबंधन के भार को स्वीकार कर सबसे पहले उक्त जगह रखी गयी समस्त वस्तुओ की सूचि बनायीं| उस सूचि के अनुसार जीतनी भी वस्तुए वहा थी वो केवल एक हिन्दू मंदिर में होती हैं अन्य किसी धार्मिक स्थल में नहीं| इस नियुक्ति के बाद से निर्मोही अखाड़े के हाथ से रामजन्मभूमि का प्रबंधन चला गया और पूरी रामजन्मभूमि नगर निगम अर्थात प्रशासन के आधीन प्रबंधन में आई| अब इस जगह के लिए पुजारियों की नियुक्ति से लेकर हर काम नगर निगम के आदेश के हिसाब से होने लगा और दिन रात पुलिस कर्मी इस जगह तैनात हो गए|

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