अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 65
जय श्री राम!
बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|
अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|
प्रश्न: सन १९४९ के पहले से रामजन्मभूमि में स्थित रामलला की पूजा कौन करता आया हैं?
अ) बाबा अभिराम दासजी
ब) महंत श्री धरम दासजी
क) प्रिय दत्ता रामजी
ड) जो भी वहा दर्शन करने जाता खुद पूजा करता
उत्तर: अ) बाबा अभिराम दासजी| निर्मोही अखाड़े के बैरागियों का रामजन्मभूमि के आसपास की जगह पर रहिवास था तथा वे मंदिर में अपनी भक्ति साधना भी करते थे| निर्मोही अखाड़े के महंत कई बार मंदिर से जुड़े कार्यो के लिए अनुबंध भी लिखाकर लेते थे और निर्मोही अखाड़े के बैरागियों ने ही रामजन्मभूमि के आसपास की कब्रे खोद कर नष्ट की हैं| बाबा अभिराम दासजी का कार्य रामलला, लक्ष्मणजी, हनुमानजी, तथा शालिग्रामजी की पूजा करना, सीता रसोई तथा पादुका की पूजा करना था और दर्शन हेतु आये भक्तों को प्रसाद भी देते थे| रामजन्मभूमि के लिए जितना निर्मोही अखाड़े का सहयोग हैं उतना ही बाबा अभिरामजी का भी हैं|
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प्रश्न: बाबा अभिरामजी के मृत्य के उपरांत उनके उत्तराधिकारी कौन बने?
अ) महंत भास्करदासजी
ब) महंत तुलसीदासजी
क) महंत धरमपालजी
ड) महंत धरमदासजी
उत्तर: ड) महंत धरमदासजी| रामजन्मभूमि के लिए जितना निर्मोही अखाड़े का सहयोग हैं उतना ही बाबा अभिरामजी का भी हैं| उनके मृत्य के उपरांत उनके उत्तराधिकारी बने महंत धरमदासजी| अपने बयान में महंत धरमदासजी ने ये बताया की दी. २ अक्तूबर १९४९ के दिन विजयादशमी थी और उसदिन बाबा अभिराम दासजी ने एक सार्वजनिक सभा में उपस्थित कई रामभक्तों के साथ ये शपथ ली थी की जन्मस्थान की पवित्रता तथा प्राचीन गरिमा को वे पुन्ह्स्थापित करेंगे| और इस बात की गवाही मुस्लिम पक्ष ने भी दी की विवादित ढाचे के मध्य गुम्बद के निचे दी. २२ दिसंबर १९४९ की रात अभिरामदासजी, धरमदासजी एवम अन्य लोगों ने मिलकर मुर्तिया स्थापित की थी| इस घटना के बाद जो प्राथमिकी पुलिस थाने में पंजीकृत की गयी उसमे निर्मोही अखाड़े के किसी भी बैरागी का नाम नहीं हैं| निर्मोही अखाड़े की और से जितने भी साक्ष्य इस अभियोग में अपना बयान देने आये उन्होंने ये बात खुलकर कही की विवादित ढांचे में कई वर्षो से मुर्तिया स्थापित थी और २२ दिसंबर की रात किसी ने भी कोई मूर्ति विवादित ढांचे में स्थापित नहीं की थी| और यही बयान निर्मोही अखाड़े के विरुद्ध हो गए| पर महंत अभिरामदासजी के तरफ से महंत धरमदासजी के साक्ष्य ने इस अभियोग में एक नया ही मोड़ ला लिया था|
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