अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 76

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: रामजन्मभूमि में किस प्रावधानों के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की नियुक्ति की गयी?

अ) आर्डर २३, नागरिक संहिता प्रक्रिया

ब) आर्डर २४, नागरिक संहिता प्रक्रिया

क) आर्डर २५, नागरिक संहिता प्रक्रिया

ड) आर्डर २६, नागरिक संहिता प्रक्रिया

उत्तर: ड) आर्डर २६, नागरिक संहिता प्रक्रिया| अगर किसी अभियोग में किसी तरह की छानबीन करवाकर उसपर विशेषज्ञ का विचार जान लेना चाहिए जिससे किसी भी पार्टी के साथ अन्याय न हो तो न्यायालय ऐसे छानबीन विशेषज्ञ की नियुक्ति आर्डर २६, नागरिक संहिता प्रक्रिया के अनुसार कर सकते है|

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प्रश्न: गोलाकार तीर्थस्थल जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रामजन्मभूमि पर किये गए उत्खनन के बाद मिला उसमे ऐसा क्या था जिसके कारण उसे एक हिन्दू पूजास्थल जाना गया?

अ) परनाला

ब) मूर्ति स्थापना के लिए विशेष गर्भगृह 

क) उपरोक्त में से कोई भी नहीं

ड) उपरोक्त में से अ) और ब) दोनों

उत्तर: ड) उपरोक्त में से अ) और ब) दोनों| रामजन्मभूमि का उत्खनन करने के बाद, ४० मी चौड़ा और ५० मी लम्बा एक बड़ा सा हॉल मिला जसमे कई स्तम्भ थे| उसके बीचोबीच एक गोलाकार तीर्थस्थल भी मिला जिसमे एक विशेष गर्भगृह था जिसमे मूर्ति की स्थापना हुई और वहा से पानी बहकर जाए इसके लिए उत्तर दिशा की तरफ एक परनाला भी बना हुआ था| या तो यह गर्भगृह किसी शिवमंदिर का था या अन्य कोई देवता वहा विराजमान थे ये तो स्पस्ट नहीं हो पाया क्यों की वहा कोई मूर्ति नहीं थी| राममंदिर महाराज विक्रमादित्य के समय से बना हुआ हैं| उसके बाद सदी डर सदी मंदिर का रखरखाव हर उस हिन्दू राजा ने किया जिसके प्रशासनिक सीमा के अन्दर यह मंदिर आता गया| भलेही मस्जिद-नुमा ढाचा बनाया गया पर हिन्दुओ ने वहा पूजा करना कभी बंद ही नहीं किया| अगर ये कहे की ये कोई बुद्ध विहार हैं तो एक ही प्रश्न हैं ऐसा कहने वालों के लिए, “बौद्ध मत के लोगों ने यहाँ पर आना क्यों बंद कर दिया? यहाँ पर बौद्ध-पूजन करना बंद क्यों कर दिया?” इन प्रश्नों का उत्तर हिन्दू और बौद्ध लोगों में आपसी कलेश निर्माण करने वाले के पास नहीं रहेगा, भलेही हर मंदिर के लिए वो ये दावा कर ले की ये बौद्ध-विहार था| ऐसा दावा करने वाले लोग न तो बुद्ध के बारे में कुछ जानते हैं और न ही बुद्ध के सिखाये मार्ग पर कभी चले हैं| ये अपने आप को बौद्ध कहने वाले वास्तव में बौद्ध हैं ही नहीं बस ये जानलो ये भेड़ की खाल में भेडिये हैं|

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