अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 77

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: चुने की सुर्खी का उपयोग भवन निर्माण कार्य में सबसे पहले कब हुआ था|

अ) कुषाण काल में

ब) गुप्ता काल में

क) राजपूत काल में

ड) मराठा काल में

उत्तर: अ) कुषाण काल में| कुषाण काल इसा पश्चात् पहली से तीसरी सदी का कालखंड हैं, या यु कहे महाराज विक्रमादित्य के बाद में विक्रम संवत की दूसरी से चौथी सदी का काल हैं| विक्रम संवत इसा के पहले ५०-६० वर्ष ही प्रारंभ हो चूका था| इस काल में चुने का पानी या चुने की सुर्खी का उपयोग कर निर्माण कार्य किये जाने लगे थे| तक्षशिला जो आज पाकिस्तान में हैं वहा पर चुने की सुर्खी से बने कई अवशेष आज भी हैं जो कुषाण काल के समय में बने हैं| इसीलिए ये कहना सर्वथा अनुचित हैं की चुने की सुर्खी का उपयोग केवल इस्लामिक निर्माणों में ही किया जाता था|

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प्रश्न: आलिंगन मुद्रा में एक मनुष्य जोड़ी किस प्रार्थनास्थल में आप देख सकते हैं?

अ) बौद्ध प्रार्थनास्थल

ब) हिन्दू प्रार्थनास्थल

क) मुस्लिम प्रार्थनास्थल

ड) जैन प्रार्थनास्थल

उत्तर: ब) हिन्दू प्रार्थनास्थल| सनातन संकृति ने पति पत्नी सहवास को जीवन का अभिन्न अंग मन हैं, इसीलिए कई हिन्दू देवता अपनी पत्नि के साथ विराजमान हैं तथा इन देवियों की भी पूजा की जाती हैं| कई मंदिरों में स्त्री-पुरुष की जोड़ी को आलिंगन करते हुए भी आप देख सकते हैं| यह आलिंगन मुद्रा वैवाहिक जीवन में प्रेम और सम्मान का प्रतिक हैं जिसे हर हिन्दू पति-पत्नी ने अपने जीवन में उतारना ही चाहिए| यह केवल हिन्दू मंदिरों में ही दिखेगा| बाकि गौतम बुद्ध और जैन भगवान सन्यासी थे उन्होंने संसार का त्याग कर दिया था तो उनके साथ उनकी पत्नी कभी स्थापित नहीं दिखेगी, और न ही बौद्ध और जैन प्रार्थनास्थलों पर पति-पत्नी सहवास वाली कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखेगा| रही बात मुस्लिम, और इसाई धर्म की तो ये एकेश्वरवादी हैं तो कोई अन्य मूर्ति वहा रहनी ही नहीं चाहिए|

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