अयोध्या निर्णय प्रश्नोत्तरी: भाग 78

   

 

जय श्री राम!

बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय| बोलो बजरंग बलि की जय|

अयोध्या निर्णय के इस प्रश्न उत्तर श्रृखला में आपका स्वागत हैं|


प्रश्न: आमलक क्या होता हैं?

अ) मंदिर के शिखर पर रखा जाने वाला पत्थर

ब) गोलाकार पत्थर से बना चक्र

क) मंदिर में स्थापित देवता का चिन्ह

ड) उपरोक्त सभी

उत्तर: ड) उपरोक्त सभी| आमलक सभी हिन्दू मंदिरों के शिखर पर स्थापित होता हैं| यह गोलाकार होता हैं तथा इसके किनारे पर धारिया होती हैं| यह मंदिर में स्थापित देवता का चिन्ह भी हो सकता हैं| जैसे अगर यह कमल के समान अनेक पंखुडियो को दर्शाता हैं तो मंदिर ऐसे देवता का होगा जिनका कमल से कोई सम्बन्ध हैं| यह अगर सुदर्शन चक्र समान दीखता हो तो मंदिर विष्णुजी या उनके अवतार का होता हैं| इस आमलक के ऊपर मंदिर शिकार पर कलश तथा ध्वजा स्थापित होती हैं| यह केवल हिन्दू मंदिरों में ही देखने मिलेगा|

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प्रश्न: क्या विवादित बाबरी ढांचे का फर्श पहले से उपलब्ध मजबूत फर्श पर ही बनाया गया था?

अ) हा

ब) नहीं

उत्तर: अ) हा| अलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने किये उत्खनन के विवरण के बाद और उत्खनन में मिली विविध प्राचीन वस्तुओ के परिक्षण के बाद यह बात मानी की विवादित बाबरी ढाचा रिक्त स्थान पर नहीं बनाया गया जैसा की सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलील थी| विवादित ढाचे के निचे कम से कम उतनेही क्षेत्रफल का पहले से निर्मित अन्य एक ढाचा था| पहले से निर्मित दीवारे और स्तंभों का उपयोग कर विवादित मस्जिद बनायीं गयी| जमीन के अन्दर २३ से ज्यादा सदियों से दबे अवशेष कही से भी इस्लामिक नहीं हैं| अगर कोई प्राचीन वस्तु जो उत्खनन में मिली हैं वो जैन या बौद्ध मत से कोई सम्बन्ध रखती हैं तो यह हिन्दू, बौद्ध और जैन संस्कृतियों के संगम का कारण मानना चाहिए| कई विदेशी पर्यटकों ने अपने भारत भ्रमण पर लिखे पुस्तकों में ये बताया हैं की हिन्दू, बौद्ध और जैन ये तीनो समाज बड़े ही बंधुभाव से रहते थे| ब्रिटिश काल के कई यूरोपियन इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ताओं ने भी ये अपनी पुस्तकों में लिखा हैं की हिन्दू, बौद्ध और जैन ये तीनो समाज बड़े बन्धुभाव से रहते थे| इस सामाजिक सौहार्द को मुस्लिम तथा यूरोपियन राजकर्ताओं ने अपने स्वार्थ के लिए तोड़ने का पूरा प्रयास किया और ये आज भी होता आ रहा हैं| जरुरत हैं हमें जागृत हो कर अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना ज्ञान बढ़ाने की| यह न्यायालय ने कई बार कहा हैं की उपरोक्त स्थान पर जो भी उत्खनन करने के बाद मिला वो तो इस्लामिक हो ही नहीं सकता पर इसकी सबसे ज्यादा संभावना हैं को दसवी-ग्यारहवी सदी में हिन्दू मंदिर हो सकता हैं| आगे न्यायालय ने यह भी कहा की पहले से निर्मित हिन्दू ढाचे पर विवादित मस्जिद का निर्माण तभी संभव हैं जब मस्जिद बनाने वाले को ये पता हो की पहले से निर्मित हिन्दू मंदिर कितना प्रबल और मजबूत हैं| और अब प्रश्न यह हैं की बाबर या मीर बाकी को कैसे पता चला की पहले से मौजूद मंदिर मजबूत हैं और उसपर ही मस्जिद बनायीं जा सकती हैं? इसका उत्तर या तो ये हैं की ये मीर बाकी पहले मंदिर में पूजा करने जाता था और बाद में किसी डर या लालच से इसने इस्लाम अपना लिया या फिर कोई भारतीय समाज का ही व्यक्ति रहा होगा जिसने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए या किसी डर या लालच के चलते राममंदिर के बारे में सबकुछ मीर बाकी और बाबर को बता दिया होंगा| यह दोनों भी सम्भावनाये अपने आप में चौकाने वाली हैं क्यों आज भी कई मीर बाकी है और कई ऐसे लोग हमारे ही समाज से हैं जो किसी लालच के चलते हिंदुत्व का विरोध कर रहे हैं|

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