मणिपुर का नाम
प्रस्तावना:
मणिपुर अभी हाल ही में काफी चर्चा में आया| इसके
कई कारण हैं|
पर एक आम भारतीय के नाते कई ऐसे लोग हैं जिन्हें
मणिपुर की वास्तविकता का पता नहीं हैं| इस
ब्लॉग सीरीज के माध्यम से मैं रिंकू ताई आपके साथ मणिपुर के विविध सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, तथा
अन्य अनेक आयामों के बारे में जानने का प्रयास कर रही हूँ| इस
ब्लॉग सीरीज को आप पढ़िए और आगे शेयर करते रहीये| यही
प्रार्थना|
मणिपुर के बारे में और पढ़ने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करिए|
यह ब्लॉग केवल मणिपुर का नाम कैसे मणिपुर बना इसपर आधारित हैं| इस राज्य को बिटिश काल के पहले से अनेक नामों से जाना जाता था| तो चलिए समझते हैं की इसका नाम कहा से आया और किसने दिया|
पडोसी राज्यों ने दिए हुए नाम:
ब्रिटिश काल के पहले अनेक रियासते थे उन्हें प्रिन्सिली स्टेट्स भी कहते हैं| मणिपुर के पड़ोस में जितनी भी रियासते थी उन्होंने मणिपुर को अपनी भाषा में अलग अलग नाम दिए थे|
बर्मा - कथे/काथे
कचेर - मोगली
असाम - मेक्ली
शंस तथा निन्गठी नदी के पूर्व में रहने वाले लोग - कास्से/कस्से
ब्रिटिश काल में दिए गए नाम:
१७६२- मणिपुर के महाराज भाग्यचन्द्र जयसिंह तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के चिट्टागोंग फैक्ट्री के प्रमुख हैरी वेरेल्स्त के बीच जो संधि / ट्रीटी हुई थी उसके अनुसार मणिपुर का नाम मेक्कली लिखा गया था|
१७९३- रेंनेल जेम्स नामक एक ब्रिटिश यात्री मुग़ल काल के समय भारत आया था, उसके अनुसार मणिपुर रियासत का नाम मेक्कली हैं|
मणिपुर प्राचीन ग्रंथों में दिए गए नाम:
मणिपुरी मेइतेइ भाषा में लिखे गए प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार भी अलग अलग नाम हैं जो इस प्रकार हैं-
हेइचाक - टिलिकोक्टोन अहानबा
खुनुंगचक - मीरा पोंगथोकलाम
लैंगबाचक - टिलिकोकटन लेइकोइरेन
शाउबोन येरेनबी - चकपा
लांगबा
कोन्नाचक - मुवापल्ली
१९६९ में खेलचन्द्र इस लेखक की पुस्तक अरिबा
मणिपुरी साहित्यगी इतिहास के अनुसार बाद में मणिपुर को पोइरेई मेइतेई कहा जाने लगा
था|
संस्कृत नाम:
मणिपुर ये संस्कृत नाम हैं जिसका सन्दर्भ महाभारत समेत की पौराणिक ग्रंथों में किया गया हैं| कई जगहों पर संस्कृत भाषा में ही इसे अरण्य नगर, महेन्द्रनगर, मेखलादेश भी कहा गया हैं|
मणिपुर पर शोधपत्र लिखने वाले कई लोग आपको मिल जायेंगे जो ये कहानी देंगे की "हिंदुत्व पहले मणिपुर में नहीं था| अठारहवी सदी में ब्राहमण लोग जबरदस्ती मणिपुर में घुसे और उन्होंने मणिपुर राज्य को हिन्दू राज्य बना दिया|" यह कहानी जो भी शोधपत्र देते हैं उनके पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं हैं| किसी भी मेइतेइ भाषा में लिखे प्राचीन ग्रन्थ में मणिपुरी लोग हिन्दू नहीं होने के प्रमाण नहीं मिलते|
गेंटू और हिन्दू
पंद्रहवी शताब्दी से कई यूरोपियन यात्री इस भारतीय उपखंड में आये| यहाँ के लोगों को उन्होंने वर्गीकृत किया - एक वर्ग था इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार मजहबी जीवन जीने वाला जिसे हम मुस्लिम कह सकते हैं और दूसरा वर्ग था गैर मुस्लिम जिन्हें यूरोपीय अपनी भाषा में पहले गेंटू कहते थे जो बाद में अठारहवी सदी में हिन्दू इस संज्ञा से प्रचलित हुआ| गेंटू या हिन्दू इस वर्ग में सभी गैर मुस्लिम आ गए फिर वो सनातनी हो, सिख हो, बौद्ध हो, जैन हो, या फिर सवर्ण हो, नीची जाती के हो, अछूत हो, चार वर्णों के हो, या अन्य घुमंतू जातियों से हो या वनवासी हो - सभी को तबतक गेंटू या हिन्दू ही कहा गया जब तक अंग्रेजी हुकूमत ने यहाँ की राजनीती में अपने पैर न फैलाये हो| जैसे ही ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ में सत्ता आने लगी उन्होंने पुरे गेंटू या यु कहें हिन्दू समाज को उनकी परम्पराओं के अनुसार वर्गीकृत कर विभाजित करना शुरू किया| यही वर्गीकरण आज भी हो रहा हैं और पूरा समाज अशांति में जी रहा हैं| इसका अर्थ यही हैं की मणिपुर में हमेशा से ही हिन्दू ही रहते थे और वे सनातन की कुछ परम्पराओं का पालन करते थे|
सन्दर्भ


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