हिमालय और मणिपुर

 


प्रस्तावना:

मणिपुर अभी हाल ही में काफी चर्चा में आया| इसके कई कारण हैं| पर एक आम भारतीय के नाते कई ऐसे लोग हैं जिन्हें मणिपुर की वास्तविकता का पता नहीं हैं| इस ब्लॉग सीरीज के माध्यम से मैं रिंकू ताई आपके साथ मणिपुर के विविध सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, तथा अन्य अनेक आयामों के बारे में जानने का प्रयास कर रही हूँ| इस ब्लॉग सीरीज को आप पढ़िए और आगे शेयर करते रहीये| यही प्रार्थना|

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हिमालय की पर्वत श्रृंखला 

मणिपुर और हिमालय का नाता हैं ऐसा जैसे माँ और बच्चे का होता हैं| जैसे एक माँ की गोद में बच्चा प्यार से बैठा होता हैं बिलकुल वैसे ही हिमालय की गोद में मणिपुर बसा हैं| 

क्या हिमालय की जगह पहले समुद्र था?

यह आज भी शोध तथा विवाद का विषय हैं की हिमालय पर्वत श्रृंखला बनी कैसे? यह कहा जाता हैं की जहा आज हिमालय हैं वहा करोड़ों सालों पहले एक समुद्र था| फिर अनेक ओरोगेनिक घटनाओं के कारण वहा हिमालय पर्वत बनना आरंभ हुआ| कुछ लाखों साल पहले हिमालय अपने अस्तित्व में आया|

जीवाश्म प्रमाण 

सन १९५२-५३ में कटल नामक एक समुद्री मछली का जीवाश्म कांगपोकपी इस हिल स्टेशन में मिला| यह कटल मछली अब विलुप्त हो चुकी हैं| इस विलुप्त समुद्री मछली का जीवाश्म इम्फाल से भी उचाई पर स्थित कांगपोकपी इस जगह पर मिलता हैं तो इसका अर्थ यही हुआ की यहाँ पहले समुद्र होने की संभावना का नकार नहीं सकते|

इम्फाल वैली का निर्माण

यह आज भी शोध का विषय हैं की हिमालय के विभिन्न भागों का निर्माण कैसे हुआ पर अगर यहाँ पहले समुद्र था तो फिर एक संभावना हैं की इम्फाल वैली निम्नलिखित तरीके से बनी होगी|

यहाँ पहले समुद्र था| फिर कई भौगोलिक घटनाएं घटी और हिमालय अस्तित्व में आया| फिर जहा आज मणिपुर हैं वहा जमीन कुछ इस तरह से उभरी की बिच में एक तालाब बन गया और चारो तरफ से पहाड़ियां| इन पहाडियों पर जंगल उग आये| 

तालाब में तलछट (सेडीमेंट) जमा होने लगा| कही कही बड़े बड़े पथ्थर तालाब में आकर गिर गए| अतिरिक्त पानी सिंकलाइन से होते हुए बह गया| और धीरे धीरे एक ऐसी जमीन बन गयी जिसमे कही कही पर पानी हैं| आज यही जमीन इम्फाल वैली के नाम से जानी जाती हैं|

इम्फाल वैली तलछट के जमने के कारण बनी हैं इसीलिए अत्यंत उपजाऊ हैं|


सन्दर्भ

१) https://ia902901.us.archive.org/9/items/in.ernet.dli.2015.463276/2015.463276.The-History_text.pdf 

इस लेख में इतना ही| यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!

जय श्री कृष्ण!

प्रार्थना:

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