हलांग
मणिपुर राज्य के उखरूल जिले के उखरूल तहसील के हालांग गांव के बारे में जानेंगे।
मेइतेई भाषा में हालांग गांव को ह्यूनिंग भी कहते है।
हालांग गांव की ३००० से ज्यादा जनसंख्या नही है।
हालांग गांव का पुरुष - स्त्री रेश्यो हैं १००० - १०११ अर्थात पुरुषों से महिलाए ज्यादा है।
हालांग गांव में ज्यादातर तंगखुल नागा जनजाति के लोग रहते है।
विकिपीडिया के अनुसार हालांग गांव में ज्यादातर लोग ईसाई हो चुके है।
तंगखूल नागा जनजाति प्रकृति पूजक है, पर ईसाई होने के बाद भी क्या ये लोग प्रकृति की पूजा कर रहे है? ये मुझे तो नही पता अगर आपको पता हो तो जरूर बताना।
हालांग गांव के निसर्ग के कारण लोग वहा पर्यटन के लिए जाते है।
हालांग गांव में कॉसमॉस फूड फेस्टिवल आयोजित किया जाता है जिसमे तरह तरह के तंगखुल पकवान खाने के लिए मिलते हैं।
हालांग गांव चिंगाई विधानसभा क्षेत्र में आता है।
हालांग गांव आउटर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है।
हालांग गांव का पिनकोड ७९५१४२ है।
हालांग गांव के नजदीक इरील तथा थाउबल नदियां है।
हालांग गांव में ईसाई मिशनरी स्कूल है।
एम के प्रेशो हालांग गांव के विधानसभा प्रतिनिधि है।
हालांग गांव में लियंगमई समुदाय के भी लोग रहते है।
लियंगमई समुदाय जो की एक आदिवासी जनजाति है वो भी प्रकृति पूजक थे। लेकिन अब वे सब भी ईसाई हो गए है।
हालांग गांव में कीवी तथा कचई लेमन की खेती होती है।
हालांग गांव मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र में आता है इसीलिए यहा पर पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े अधिनियम लागू होते है, जो इस क्षेत्र को विशेष क्षेत्र का दर्जा देते है।
पहाड़ी क्षेत्र के कानून ब्रिटिश राज के पहले नही थे, ये अंग्रेजो को बोया वो जहर है जो आज भी मणिपुर को खोखला बना रहा है।
हालांग गांव पहाड़ी क्षेत्र में आता है इसीलिए यहां विलेज अथॉरिटी होती है जिसके सचिव का चयन चुनाव से किया जाता है। गांव के विलेज अथॉरिटी के अन्य सदस्यों का भी चयन चुनाव पद्धति से होता है।
तो यह थी जानकारी हलांग गांव की। यहां तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।
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