होली पर ज्ञान

 

होली पर ज्ञान

कोई बड़े हिन्दू त्योहार पर धर्म विरोधी ताकते हिन्दू जन मानस को नीचा दिखाने के लिए और अपने आप को बड़ा ज्ञानी बताने के लिए सक्रिय हो जाती हैं। आज हम देखते हैं कि जैसे ही होली आई है कई बड़े-बड़े व्यवसायिक संघटन (अरेsss कंपनियां) अपने विज्ञापन इस तरह देती है जैसे मानो होली मनाएंगे तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा। पर्यावरण का दुनिया भर का ज्ञान केवल होली के समय पर इन विज्ञापनों में, सामाजिक संचार माध्यम पर कई नीले निशान वाले खातों पर, इस तरह दिया जाता है जैसे मानो साल भर तो बहुत अच्छा पर्यावरण रहता है।

आज अभीव्यक्ति की स्वतंत्रता (अरेsss फ्रीडम ऑफ स्पीच एण्ड इक्स्प्रेशन) के नाम पर हर कोई मुंह खोल के जो मन मे आता है वह सामाजिक संचार माध्यम पर लिख रहा है, बोल रहा है। जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है वैसे-वैसे आपको होलीका कैसे मूलनिवासी थी और कैसे सनातन पुरुष प्रधान संस्कृति ने उसकी बलि ली इस पर आधारित कई लेख मिल जाएंगे, कई वीडियो मिल जाएंगे। पर उसमें होलीका कश्यप ऋषि की पुत्री थी यह मूल तथ्य कहीं पर भी नहीं रहेगा। एक बालक को जीवित जलाने के लिए चिता पर बैठने वाली स्त्री कैसे किसी का आदर्श हो सकती है? होलीका चिता पर प्रल्हाद जी को लेकर उन्हें जीवित जलाने की मंशा से ही बैठी थी। होलिका को पीड़ित बताने के पहले यह भी जानना जरूरी है कि उसके कर्म क्या थे?

एक स्त्री से पूरा समाज प्रेम, करुणा, दया, वात्सल्य इन भावनाओं की अपेक्षा करता है ना की होलीका की तरह किसी बालक को जीवित जलाने की। और एक महिला को प्रेम, करुणा, दया, वात्सल्य यही भावनाएं पूर्ण करती हैं| यह सकारात्मक भावनाएं जरा भी किसी व्यक्ती को बुजदिल या कमजोर नहीं करती। सोचिए अगर यह सकारात्मक भावनाएं इस जगत से मीट गई तो क्या होगा?

इन दिनों यह भी आपको बार-बार पढ़ने में आएगा की किस तरह हिंदू समाज महिलाओं पर अत्याचार करता है और एक महिला को जलाकर त्यौहार मनाता है। उपलब्ध इतिहास के अनुसार ऐसी कोई घटना नहीं है जिस पर किसी महिला को होलीकादहन के समय जीवित जलाया गया हो। होलीकादहन एक विष्णु भक्त के सकुशल होने तथा एक आसुरी प्रवृत्ति वाली महिला का अंत होने के कारण मनाया जाता है।

पर आज हमारी यह हालत क्यों हुई की हर कोई हमारे ही त्योहार पर हमें ज्ञान देता है? इस प्रश्न का उत्तर हम हिंदू ही है। कैसे? यह जानने के लिए तो आपको पूरी पुस्तिका पढ़नी पड़ेगी।

ये कुछ ऐसे लेखों के उदाहरण हैं।

 

अगर आप मेरे कार्य से सहमत हैं तो कृपया इस पुस्तिका को अन्य भाई-बहनों के साथ साझा करें।

ऐसी ही और चिंतन पुस्तिकाये आपके मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन के लिए मैं लिख सकु इसके लिए अपनी शक्ति के अनुसार नीचे दिए क्यू आर कोड को स्कैन कर दान दे।

यहा तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!

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