५) जोगन:
५) जोगन:
१९५० में एक फिल्म आई ‘जोगन’। इस फिल्म
में ‘डालो रे रंग डालो रे रसिया’ यह गाना होली पर चित्रित किया गया है। पूरे गाने
का अर्थ है प्रेमीका प्रेमी के साथ लाज शर्म भूल कर होली के मौके पर एक होने के
लिए तैयार है। [1]
यह फिल्म केदार शर्मा ने दिग्दर्शित
की थी। इस फिल्म में नायिका का नाम मीराबाई (नरगिस दत्त उर्फ फातिमा रशीद) है जो
एक विवाहित स्त्री है। नायिका पराए पुरुष विजय (मो. यूसुफ़ खान) जो नास्तिक है उससे
प्रेम करती हैं।[2] पूरी
फिल्म ही हिन्दू भावनाओं को आहत करती हैं। यह फिल्म विवाहबाह्य प्रेमसंबद्धों को
बढ़ावा देती हैं। पर यह अपने जमाने मे सुपरहिट हुई थी क्यू की हम हिन्दू ही मीरा के
भजनों से प्रभावित होकर इसे देखने गए थे। राजस्थान की संत परंपरा में मीराबाई एक
महान कृष्णभक्त संत होकर गई है। उनके कई भजन इस फिल्म में हैं।
मीराबाई कृष्ण की भक्त थी। इस फिल्म
में जो मीरा नाम का किरदार है वह पर-पुरुष के प्रेम में अंधी हो चुकी हैं। भक्तिमय
होना और प्यार में अंधा होना दोनों में उत्तर और दक्षिण का फर्क है। पर इस फिल्म में
दोनों को एक ही रंग में रंगा है। और यह एक ट्रेंड बन चुका हैं की प्रेम और भक्ति
को एक ही तराजू मे तोला जाए। मीराबाई जैसी महान हिन्दू संत की भक्ति की तुलना एक
विवाहबाह्य प्रेमसम्बद्ध से कैसे की जा सकती हैं?
[1]
https://lyricsing.com/jogan/daro-re-rang-daro-re-rasiya.html
[2]
https://en.wikipedia.org/wiki/Jogan_(film)
अगर आप मेरे कार्य से सहमत हैं तो कृपया इस पुस्तिका को अन्य भाई-बहनों के साथ साझा करें।
यहा तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!
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