होलिका उत्सव का मूल स्वरूप
होलिका
उत्सव का मूल स्वरूप
आगे बढ़ने से पहले होली का उत्सव का
मूल स्वरूप समझ कर लेते हैं। होली भारतीय सौर वर्ष के समाप्त होने के पहले का पर्व
है। इस समय प्रकृति विविध रंगों में रंगी रहती है और होली तथा रंग पंचमी इन्ही
रंगों को सम्मान देनेवाले पर्व है।
वैसे होलीका दहन से लेकर रंगपंचमी तक
यह उत्सव दो पर्वों का है। पर आजकल केवल दो दिन होली मनाई जाती है, पहले दिन होलिका दहन
होता है और दूसरे दिन रंग से हम उत्सव मनाते हैं।
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यहा तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!
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