२) औरत:

 



२) औरत:

१९४० के पहले तक भारतीय सिनेमा में प्राचीन इतिहास पर आधारित फिल्में बनती थी। १९४० आते आते फिल्मों में अन्य विषयों पर भी चित्रण शुरू हो गया था खासकर सामाजिक समस्याओं पर। १९४० के दशक मे महबूब खान ने फिल्म बनाई ‘औरत’। इस फिल्म मे दो होली के गीत हैं। पहला ‘जमुना तट शाम खेले होली’ और दूसरा ‘आज होली खेलेंगे साजन के घर’।

‘जमुना तट शाम खेले होली’ इस गीत को भजन की तरह आज भी गाया जाता हैं। इस गीत के बोल मे अथवा इसके चित्रण मे कोई आपत्ति नहीं  हैं। यह गीत राधा और कृष्ण के होली का वर्णन है।[1]

इसी फिल्म का दूसरा गीत हैं ‘आज होली खेलेंगे साजन के घर’। इस गीत का पूरा अर्थ यह निकलता हैं की प्रेमिका अपने प्रेमी के घर जाकर ही होली खेलना चाहती है। प्रेमिका को ही प्रेमी से मिलने की जिद है। प्रेमिका एक १६-१७ साल की कन्या हैं और अपने प्रेमी से मिलने के लिए और उसके साथ होली मनाने के लिए आतुर है।[2]

इस गीत में प्रेम विवश प्रेमिका दिखाई गई है। कहीं पर भी इस गीत में त्यौहार वाला या भक्ति वाला कोई भाव ही नहीं है। १९४० के दशक से लेकर आजतक बाली उम्र का प्यार सबसे पवित्र होता हैं और वही सच्चा होता हैं ये हर एक फिल्म मे बताया गया हैं। पर सच तो ये हैं की बाली उम्र मे लड़के लड़कियाँ अगर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे या कोई स्किल सीखेंगे तो उनके लिए ज्यादा अच्छा रहेगा।



[1] https://genius.com/Sardar-akhtar-jamuna-tat-shyaam-khelen-hori-lyrics

[2] https://www.youtube.com/watch?v=PNkvWwgtAT4


 

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