हिंदी सिनेमा के दुखी सीन

हिंदी सिनेमा के दुखी सीन

हमेशा से ही हिंदी सिनेमा भारतीय त्योहारों को मनहूस बताने की कोशिश करता आया है। दामिनी जैसी एक फिल्म आती है और वह सुपरहिट हो जाती है जबकि फिल्म में होली को बलात्कार का मौका बताया गया? हमने देखी तभी तो फिल्म हिट हुई ना!

अगर कोई जेम्स आफ बॉलीवुड जैसा विचार प्रवर्तक आता है और फिल्मों की यह गंदगी बड़े अभ्यास पूर्ण तरीके से सबके सामने लाता है तो फिर वह क्या गलत करता है? इतने सालों तक हमारे त्योहार हमारे ही देश की फिल्मों में गलत तरीके से बताए गए और आज भी यह सिलसिला भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए जारी है उसके पीछे कहीं ना कहीं हिन्दू समाज कारण हैं। भारत की जनसंख्या का अधिकतर हिस्सा हिन्दू धर्म को मानता हैं। हमने ही ये ऐसी फिल्मे देखी हैं और हम ही जो आज भी हमारे त्योहारों पर इन फिल्मों के अर्थहीन गीतों को सुनते और सुनाते हैं। रेडियो पर, टीवी पर सब जगह ये गाने इसीलिए चलाए जा रहे हैं क्यू की हम सुन और देख रहे हैं।

हम ही हैं जो होली के बॉलीवुड सोंग्स यूट्यूब पर सर्च करते हैं और उन्हें जोर-जोर से हमारे होली पर्व पर बजाते हैं। इन गीतों का अर्थ, इनमें बताए गए डांस स्टेप्स और गीतों में जो होली आयोजन बताया गया है वह विकृत और विकृत होता जा रहा है। अब समय आ गया है कि हम खुलकर कहें हिंदू त्योहारों का विकृत स्वरूप चित्रित करना बंद करें।

स्वतंत्र भारत में और इतना ही नहीं ब्रिटिश काल के भारत में भी सबसे ज्यादा फिल्मों की कमाई अगर किसी समुदाय से होती थी तो वह हिंदू समुदाय था। हिंदू समुदाय के लोग मनोरंजन के लिए शुरू से फिल्में देखते आए हैं। यह फिल्में, फिल्मों के कलाकार अगर प्रसिद्ध हो पाए हैं तो वह केवल उनके हिंदू दर्शकों की वजह से। खून की होली जैसे डायलॉग पर सीटियां बजाने वाले ज्यादातर हिंदू ही थे। होली के गानों में भीगती हुई लड़की को देखकर तालियां बजाने वाले ज्यादातर हिंदू ही थे। और आज भी होली के अश्लील गाने लूप में बज रहे हैं तो वह किसी हिंदू के होली मिलन कार्यक्रम में ही। अगर हम ही इस अश्लीलता को बार-बार सुन रहे हैं तो फिर अन्य लोगों को आसानी से मौका दे रहे हैं कि वह हमें सिखाएं ‘हमने त्यौहार कैसे मनाना? 




लिजेंडरी डायलॉग ‘तारीख पर तारीख’ की फिल्म ‘दामिनी’ के सीन का स्क्रीनशॉट 

अगर आप मेरे कार्य से सहमत हैं तो कृपया इस पुस्तिका को अन्य भाई-बहनों के साथ साझा करें।

यहा तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!

अनुक्रमणिका


Comments

Popular posts from this blog

कानिफनाथ महाराज

सूरत का ज्वालामुखी: हिंदुस्तान की एकता और अंग्रेजी दमन की खूनी गाथा

त्र्यंबक, तहसील त्र्यंबकेश्वर, जिला नासिक: