प्रस्तावना:
प्रस्तावना:
आज होली यह पर्व बड़ी विकृत तरीके से जगह-जगह मनाया जाता है। कही लोग अंडे एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं। कहीं पर दीवारों और फर्नीचर के पेंट और वार्निश के रंगों से होली खेलकर त्वचारोगों को बुलाया जा रहा हैं। कहीं लोग नशे में धुत है। कहीं-कहीं पर मर्यादाएं लांघी जा रही है जिससे कई पुलिस केसेस हर साल दर्ज हो रही है। और इन सबके चलते हिंदुओं का ज्ञान देने वाले कई विज्ञापन आपको जगह जगह देखने मिल जाते हैं।
कुछ उदाहरण
आज यह विकृत स्वरूप जिन कारणों से है उनको बढ़ावा किसने दिया? यह प्रश्न चिंतन का विषय है। पर क्या होली इस विकृत मानसिकता को बढ़ावा देने वाला पर्व है या इसे सोच समझकर विकृत किया गया है? आइए इस पुस्तिका से समझते हैं की होली को विकृत करने मे सिनेमा के गानों का कितना योगदान हैं?
इस चिंतन पुस्तिका में आप जानेंगे होलीका उत्सव का मूल स्वरूप क्या है? क्यों यह उत्सव मनाया जाता था? और किस तरह से मनाया जाता था? आप पढ़ेंगे कुछ हिंदी सिनेमा के गीतों के बारे मे जो अक्सर होली मिलन के अवसर पर बड़े जोर शोर से बजाए जाते हैं। और देखने मे ये भी आता हैं की हिन्दी फिल्मों के सेट के जैसा या टीवी सेरियल्स के सेट के जैसा व्यवस्थापन और ताम झाम होली मिलन पर किया जाता हैं। यह होली मिलन का आयोजन क्या उचित है? हिन्दी गीतों के बारे मे ही यहा चर्चा की गई हैं।
होली मनाते फिल्मी सितारे
यह पुस्तिका लिखने के पीछे का उद्देश्य केवल इस पर्व की गरिमा बनाए रखने के लिए चिंतन करना है। तथा उपाय क्या कर सकते? इसका उत्तर ढूंढना भी है।
अगर आप मेरे कार्य से सहमत हैं तो कृपया इस पुस्तिका को अन्य भाई-बहनों के साथ साझा करें।
ऐसी ही और चिंतन पुस्तिकाये आपके मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन के लिए मैं लिख सकु इसके लिए अपनी शक्ति के अनुसार नीचे दिए क्यू आर कोड को स्कैन कर दान दे।
यहा तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!
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