महाकुंभ

मुझे कविता लिखने नहीं आती।
पर मैने grok की सहायता से महाकुंभ पर एक छोटी कविता लिखी है।
क्या ऐसी कविताएं हम ५ साल के बालक को सिखा सकते है?


नदियों का संगम,
महाकुंभ का आगमन,
भक्ति का उल्लास,
संस्कृति का प्रसार।

स्नान करते संत,
मंत्रों का आलाप,
मोक्ष की चाह में,
सब मिलकर जाप।

संगम की धारा में,
हर पाप धुल जाता,
श्रद्धा का सैलाब,
हर मन में उठता।

अखाड़ों की छटा,
नगाड़ों की ध्वनि,
शाही स्नान का दृश्य,
जैसे स्वर्ग की छवि।

कलशों से जल छलकता,
आस्था की धार बहती,
हर हृदय में उमंग,
महाकुंभ की आहट सुनती।

सदियों से चली आ रही,
यह परंपरा अनूठी,
महाकुंभ का मेला,
विश्वास की सुखद कहानी।

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