महाकुंभ का मेला


महाकुंभ का मेला,
बहुत बड़ा और खेला।
नदी में नहाना है,
सबको मन में आना है।

संत, साधु, और लोग,
सब मिलकर करते जोग।
पूजा करते हैं सब,
खुशी-खुशी सबकी धड़कन।

बड़े-बड़े ध्वज लहराते,
सब मिलकर गाते-जाते।
महाकुंभ में मिलते हैं,
दोस्त बनकर सब रहते हैं।


Comments

Popular posts from this blog

कानिफनाथ महाराज

सूरत का ज्वालामुखी: हिंदुस्तान की एकता और अंग्रेजी दमन की खूनी गाथा

त्र्यंबक, तहसील त्र्यंबकेश्वर, जिला नासिक: