छेरछेरा पर्व



छेरछेरा आया है, आंगन में खुशियों का मेला,
हाथ में टोकरी, दान मांगने का है अब वेला।
मां-बाप ने समझाया, दान देना है बड़ा काम,
इससे मिलता है पुण्य, मिटते हैं सारे दुख की आम।

छोटे-छोटे बच्चे, घर-घर जाकर मांगें दान,
धान और सब्जियां, सब ही देते हैं अपने मन।
दान देने से मन खुश होता है, चेहरे पर आती है मुस्कान,
यही है सच्चा धर्म, जो करता है हमें इंसान।

छेरछेरा का त्योहार, सिखाता है हमें सबक,
सबको मिलकर रहना, एक दूसरे की करना मदद।
दानधर्म की है बात, जो कभी न भूलना चाहिए,
देने से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सुख, सही।

क्रेडिट grok ai by X 

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