हिंदू संस्कार भाग १

भगवान वेदव्यास जी ने सोलह संस्कारों को प्रधानता दी है
#सोलह_संस्कार: एक परिचय
प्राचीन भारतीय संस्कृति में, भगवान वेदव्यास जी ने मानव जीवन को पवित्र और समृद्ध बनाने के लिए सोलह संस्कारों का प्रतिपादन किया। ये संस्कार गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक के विभिन्न चरणों में किए जाते हैं और व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परन्तु आधुनिक युग में व्यस्तता का कारण अथवा अवैज्ञानिक बता कर इन सभी संस्कारों को किया नहीं जाता। कुछ एक संस्कार किए भी जाते है तो उसमें संस्कार की मूल भावना की जगह व्यापारिकरण को बढ़ावा दिया गया है या उनके सहारे स्टेटस सिंबल का दिखावा किया जा रहा है।
वेदों और पुराणों में सोलह संस्कार
वेदों में संस्कारों का उल्लेख बीज रूप में मिलता है। ये बीज रूप में रहने के कारण कई बार आम लोगों को नहीं समझता। इसका एक मात्र कारण है कि वेद अध्ययन ही अब बंद हो चुका है। थोड़े बहुत जो लोग वेदाभ्यास करते है उनकी बात कोई नहीं सुनता न ही समझता। 
गृह्यसूत्रों में संस्कारों का विस्तृत वर्णन किया गया है। पर जब ये बात बोली जाती है तब गृहसूत्र क्या है? इस प्रश्न से तर्क कुतर्क शुरू किए जाते है और मूल #सोलह_संस्कार का विषय कही और ही रह जाता है।
यजुर्वेद में गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन जैसे संस्कारों का उल्लेख है। पर वेद में लिखी बात को आधुनिक विचारधारा के अंग्रेजी माध्यम में पढ़े अभिभावक अपनाना ही नहीं चाहते। अब अपनाना नहीं चाहते है तो इसका कुछ तो कारण देकर निपटारा करना है तो सीधा कहते है कि बच्चे नहीं सुनते। इन अभिभावकों से मेरा एक प्रश्न है कि, "माता पिता आप है ये आपके बच्चे है?" जो अभिभावकों को नहीं करना है वो बच्चों का बहाना बनाकर वे नहीं करते। ज्यादातर पढ़े लिखे आधुनिक अभिभावक #सोलह_संस्कार केवल इसीलिए नहीं करना चाहते क्यों कि वे बस इसे अवैज्ञानिक मानते है और ब्राह्मण को दक्षिणा देना उन्हें बहुत बड़ा खर्च लगता है।
पुराणों में संस्कारों को विस्तृत रूप से समझाया गया है। पर पुराणों को भी कोई पढ़ता नहीं है। विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण और मत्स्य पुराण में संस्कारों का महत्व बताया गया है। इनमें संस्कारों को मानव जीवन के शुद्धिकरण और उत्थान के लिए आवश्यक बताया गया है।
पर जब जीवन का अर्थ ही कुछ और जिसने जाना है वो इन संस्कारों के महत्त्व को भी नहीं समझेगा। आज कलयुग के समय में जीवन का अर्थ केवल पैसा कमाना और उस धन का दिखावा करना ही रह गया है।
#सोलह_संस्कारों का महत्व
ये संस्कार व्यक्ति को धार्मिक और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारते हैं और उसे समाज में एक सम्मानित स्थान प्राप्त करने में सहायता करते हैं। ये संस्कार परिवार और समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। क्यों कि जब भी किसी के घर में ऐसे किसी संस्कार का आयोजन किया जाता है तब परिवार और समाज के स्त्री और पुरुष एकत्रित होते है। और वे ईश्वर से उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना करते है जिस व्यक्ति पर संस्कार किए जा रहे है।
सोलह संस्कारों के नाम
आधुनिक शिक्षा पद्धति में भले ही इन संस्कारों का कोई महत्व कभी नहीं बताया गया हो पर ये आज भी कुछ लोगों के कारण जीवित है। जिनपर ये पूरे #सोलह_संस्कार किए जाते है वे समाज के समक्ष अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करते है और जीवन में वे सद्गति के पथ पर अग्रसर होते है। इन संस्कारों के नाम निम्न लिखित है - 
1. गर्भाधान संस्कार
2. पुंसवन संस्कार
3. सीमन्तोन्नयन संस्कार
4. जातकर्म संस्कार
5. नामकरण संस्कार
6. निष्क्रमण संस्कार
7. अन्नप्राशन संस्कार
8. चूड़ाकर्म संस्कार
9. कर्णवेध संस्कार
10. विद्यारम्भ संस्कार
11. उपनयन संस्कार
12. वेदारम्भ संस्कार
13. केशान्त संस्कार
14. समावर्तन संस्कार
15. विवाह संस्कार
16. अन्त्येष्टि संस्कार
इन सब पर विस्तृत जानकारी देने वाली पोस्ट निकट भविष्य में लिखी जाएगी इसीलिए मुझे फॉलो कर लीजिए। 
क्या आपको इन संस्कारों के बारे में पता था? अगर हा तो अपने विचार अवश्य कमेंट करिए।

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